यह मसला है ही ऐसा, जिसमें नरेंद्र मोदी
को 'भारत के प्रधानमंत्री' की जगह 'संघ के स्वयंसेवक' के तौर पर संबोधित
करना पड़ रहा है। दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो सार्वजनिक घटनाक्रम देखने के लिए
मिला है, उसके बाद नरेंद्र मोदी ने ख़ुद के लिए जितने भी मिथक, भ्रम और कल्पनाएँ
गढ़ रखी थीं, तमाम नष्ट हो चुके हैं।
भारत के अपने फ़ैसले, भारत की अपनी
नीतियाँ, इन सबकी घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप क्यों कर रहे हैं? - यह एक ऐसा सवाल है, जिसका स्पष्ट और ठोस जवाब ना तो पीएम मोदी
के पास है, ना उनकी मातृ पितृ संस्था या संगठनों के पास।
भारतीय नागरिकों का विवादित निर्वासन, उसके
बाद सीज़फायर और फिर टैरिफ़ के मामले में भारत सरकार और भारत के प्रधानमंत्री को
लगभग हड़काने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत-अमेरिका डील, व्यापार, आर्थिक
नीतियाँ, भारत को कहाँ से क्या ख़रीदना चाहिए और कहाँ से नहीं ख़रीदना चाहिए, इस
तरह की खुली तानाशाही के साथ शाम-दाम-दंड और भेद की खुली नीति पर चलते हुए दुनिया
के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को और उसके पीएम मोदी को हैंडल किए जा रहे हैं।
हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति
ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे
वादा किया है कि भारत रूस से तेल ख़रीदना बंद कर देगा। सार्वजनिक है कि रूस से
भारत की तेल ख़रीदी मामले को लेकर बहुत पहले से बात हो रही है। किंतु ऑपरेशन
सिंदूर के तुरंत बाद इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सार्वनिजक तौर पर 'आदेशात्मक' लहज़े के साथ कहने
लगे थे।
अनेक प्रमुख अख़बारों में ख़बरें छपी कि अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनसे भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया है कि
भारत रूस से तेल ख़रीदना बंद कर देगा। और ट्रंप ने यह दावा एक से अधिक बार खुले आम
किया है।
ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि यूक्रेन युद्ध को ख़त्म करने के
लिए रूस पर आर्थिक दबाव बनाना ज़रूरी है और उससे तेल ख़रीदने वाले देश अप्रत्यक्ष
रूप से युद्ध में रूस की मदद कर रहे हैं। भारत द्वारा रूस से तेल ख़रीदने के मामले
में ट्रंप इससे पहले भी भारत को रूस से तेल नहीं ख़रीदने का अनुरोध आदेशात्मक
लहज़े में और धमकी भरे अंदाज़ में कर चुके हैं।
अब तक भारत सरकार ने इस अनुरोध का नपातुला विरोध किया है। इसके
बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी बढ़ा। किंतु अब अमेरिकी राष्ट्रपति
ट्रंप का यह दावा कि भारत के पीएम मोदी ने उनसे रूस से तेल नहीं ख़रीदने का वादा
कर दिया है, एक और धारणा का सृजन कर रहा है, जिसमें दावा किया जा चुका है
कि मोदी सरकार ट्रंप की माँगों और लगभग आदेशात्मक अनुरोधों को पिछले दरवाज़े से
स्वीकार कर रही है।
बात शुरू करने से पहले नोट करें कि ट्रंप ने अपने पहले
कार्यकाल में दबाव बनाकर भारत का ईरान से तेल आयात बंद करवा दिया था। सिर्फ़ तेल
ही नहीं, ट्रंप भारत में कृषि, कृषि उत्पाद और संसाधन, आईटी, ऊर्जा, तकनीक, समेत
कई क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को फ़ायदा पहुँचे ऐसी भारतीय नीतियों के लिए
ज़िद पर अड़े हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
का दावा
15 अक्टूबर 2025 को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के
दौरान पत्रकारों से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने रूस से तेल ख़रीदना बंद करने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने कहा,
"यूक्रेन
युद्ध एक ऐसी जंग थी जो रूस को एक हफ़्ते में जीत लेनी चाहिए थी, लेकिन इसको चार साल
हो चुके हैं। मैं यह युद्ध ख़त्म होते देखना चाहता हूँ। मैं रूस से भारत के तेल
ख़रीदने से ख़ुश नहीं था। आज उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि वो रूस से तेल नहीं
ख़रीदेंगे। यह एक बड़ा कदम है।"
रूस कच्चे तेल और गैस का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, जिनके
प्रमुख ख़रीदार चीन, भारत और तुर्की हैं। ट्रंप ने अपने ओवल ऑफिस में कहा,
"अब
मुझे चीन को भी ऐसा करने के लिए मनाना है।"
ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में भारत के बारे में कहा,
" प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी मेरे मित्र हैं। हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। मैं इस बात से ख़ुश
नहीं था कि भारत तेल ख़रीद रहा है और उन्होंने आज मुझे आश्वासन दिया कि वे रूस से
तेल नहीं ख़रीदेंगे।"
ट्रंप ने इसे रूस को अलग-थलग करने की दिशा में 'बड़ा कदम' बताया, जो यूक्रेन पर रूस के
आक्रमण को जारी रखने के लिए मॉस्को को धन मुहैया कराने वाले आयातों को रोकने में
मददगार साबित होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि भारत 'तुरंत' तेल आयात बंद नहीं कर
सकता, लेकिन यह बदलाव 'एक प्रक्रिया का हिस्सा' है और यह 'जल्द' ही पूरा हो जाएगा।
इससे पहले भी ट्रंप भारत के ऊपर रूस से तेल नहीं ख़रीदने का
दबाव डाल चुके हैं। ट्रंप ने उन दिनों कहा था कि भारत रुस के युद्ध से मुनाफ़ा कमा
रहा है।
सार्वजनिक है कि ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50 फ़ीसदी तक टैरिफ़
लगा दिए हैं और इस बड़े टैरिफ़ को ट्रंप ने रूस से तेल और हथियार ख़रीदने के लिए
भारत को दी गई 'सज़ा' बताया था। अगस्त 2025 से लागू हो चुके इस
टैरिफ़ में रूस से लेन-देन पर 25 फ़ीसदी अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।
ट्रंप ने अपना दावा तीन
बार फिर दोहराया
अपने पहले दावे के बाद जब भारत सरकार ने उस दावे का खंडन किया,
तो उसके बाद 17 अक्टूबर को ट्रंप ने
अपना वह दावा फिर दोहराया।
इस दिन ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति
ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात के दौरान अपने इस दावे को दोहराया कि भारत ने रूसी तेल
नहीं ख़रीदने की बात उनसे कही है। उन्होंने कहा, "भारत अब रूसी तेल ख़रीद नहीं करेगा। और
उन्होंने पहले ही तनाव कम कर दिया है, और कमोबेश रुक भी गए हैं; वे पीछे हट रहे हैं।
उन्होंने लगभग 38 प्रतिशत तेल ख़रीदा
है, और अब वे ऐसा नहीं करेंगे।"
इसके बाद 21 अक्टूबर के दिन दिवाली पर्व के मौक़े पर व्हाइट हाउस में
ट्रंप ने कहा,
"मैं
भारत के लोगों से प्यार करता हूँ। हम दोनों देशों के बीच कुछ बेहतरीन समझौतों पर
काम कर रहे हैं। मैंने आज प्रधानमंत्री मोदी से बात की और हमारे बीच बहुत अच्छे
संबंध हैं। वे रूस से ज़्यादा तेल नहीं ख़रीदेंगे।"
ट्रंप ने आगे कहा, "वे भी मेरी तरह रूस और यूक्रेन के बीच
युद्ध को ख़त्म होते देखना चाहते हैं। वे बहुत ज़्यादा तेल नहीं ख़रीदने जा रहे
हैं। इसलिए उन्होंने इसमें काफ़ी कटौती कर दी है और वे इसमें लगातार कटौती करते जा
रहे हैं...।"
23 अक्टूबर के दिन व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रटे के
साथ बैठक के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा,
"भारत,
जैसा कि आप जानते हैं, ने मुझसे कहा कि वे इसे रोक देंगे। यह एक प्रक्रिया है; आप इसे तुरंत नहीं
रोक सकते। लेकिन साल के अंत तक, यह लगभग शून्य हो जाएगा। यह बहुत बड़ी बात
है।"
ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर मैंने ही
कराया था, व्यापार और डील की धमकी देकर कराया था, ट्रंप यह दावा पचासों बार कर
चुके हैं। अब यह दावा कि पीएम मोदी ने उन्हें भरोसा दिया है कि भारत रूस से तेल
ख़रीदना बंद कर देगा, आठ दिनों में ट्रंप ने यह दावा चार बार किया है। आगे इसमें
भी निसंदेह वृद्धि होगी।
ट्रंप के इस नये दावे से
पहले रूस से तेल ख़रीद पर भारत का रुख़ क्या था?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने इस नये दावे से पहले अनेक बार 'आपत्तिनजक' और लगभग 'धमकी' भरे अंदाज़ में भारत से अनुरोध कर चुके
हैं कि भारत रूस से तेल ख़रीदना बंद करें। बदले में भारत सरकार ने नपेतुले अंदाज़
में अपनी जनता को बताया कि इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा रहा।
यूँ तो एक फ़ोन कॉल से यूक्रेन युद्ध रोकने का पीएम मोदी का वो
दावा सोशल मीडिया पर उनकी बहुत फ़ज़ीहत करा चुका है। रही बात रूस-यूक्रेन युद्ध
की, तो इस मसले पर पीएम मोदी ने पिछले कुछ महीनों से अपना रुख़ स्पष्ट रखते हुए
कहा है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध में निष्पक्ष है।
जैसा कि सबको पता है, भारत और रूस के बीच पुराने और घनिष्ठ
संबंध रहे हैं। भारत अपने आर्थिक हितों के लिए रियायती दरों पर रूस से कच्चा तेल
ख़रीदता आ रहा है।
ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने यूक्रेन युद्ध को मोदी का
युद्ध तक कह दिया था। भारत पर टैरिफ़ लगाने के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को कहा
था,
"भारत
ने रूस से तेल ख़रीदकर पुतिन के युद्ध को वित्तपोषित किया है। मैंने 50% टैरिफ़ लागू कर दिया
है, और अगर ज़रूरत पड़ी तो और सख़्त कदम उठाए जाएँगे।"
भारतीय अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन के इस आरोप को "दोहरा
मानदंड" बताया था, जब अमेरिका ने आरोप लगाया था कि भारत रूस के युद्ध से
मुनाफ़ा कमा रहा है। भारत ने दलील दी थी कि अमेरिका और यूरोप भी रूस के साथ
व्यापार जारी रखे हुए हैं।
रूसी तेल ख़रीद का हवाला देकर भारत पर टैरिफ़ लगाने के अमेरिकी
फ़ैसले के जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी थी कि,
"यह
कार्रवाई अनुचित, अकारण और तर्कहीन है।"
भारत ने कहा था, "हाल के दिनों में अमेरिका ने रूस से
भारत के तेल आयात को निशाना बनाया है। हम इन मुद्दों पर पहले ही अपना रुख़ स्पष्ट कर
चुके हैं, जिसमें यह तथ्य भी शामिल है कि हमारा आयात बाज़ार की परिस्थितियों पर
आधारित है और इसका उद्देश्य भारत की एक अरब 40 करोड़ आबादी की ऊर्जा सुरक्षा
सुनिश्चित करना है।"
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स
फोरम 2025 में कहा था, "हम राष्ट्रीय हित में
निर्णय लेते हैं।" उन्होंने अमेरिकी आलोचना पर कहा था,
"व्यापार-समर्थक
अमेरिकी प्रशासन के लोगों से यह सुनना मज़ेदार है कि दूसरे लोग व्यापार कर रहे
हैं। अगर आपको भारत से तेल या परिष्कृत उत्पाद ख़रीदने में समस्या है, तो न
ख़रीदें। कोई ज़बरदस्ती थोड़े ही करता है। यूरोप ख़रीदता है, अमेरिका ख़रीदता है, तो
आपको पसंद न हो तो न ख़रीदें।"
भारत-रूस तेल कारोबार के
ताज़ा हालात
रूस से तेल और सैन्य उपकरण ख़रीदने पर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त
टैरिफ़ लगाया था और इसे भारत को दी गई 'सज़ा'
के रूप में दर्शाया था।
2022 से जब पश्चिमी देशों ने रूसी ऊर्जा पर प्रतिबंध लगाए, तब से
भारत रूस का सबसे बड़ा तेल ख़रीदार बन गया है। रॉयटर्स के आँकड़ों के अनुसार रूसी
कच्चा तेल भारत के कुल तेल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ़ के
बावजूद भारत ने रूस से कच्चा तेल ख़रीदना जारी रखा। थिंक टैंक सेंटर फ़ॉर रिसर्च
ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के मुताबिक़ सितंबर 2025 में भारत ने रूस से 2.5 अरब यूरो, यानी 2.91 अरब डॉलर की कच्चे
तेल की ख़रीद की थी।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है, जबकि
सितंबर 2025 में चीन के बाद भारत
रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा ख़रीदार बना रहा।
सीआरईए के मुताबिक़ सितंबर 2025 में भारत ने रूसी जीवाश्म ईंधन की कुल 3.6 अरब यूरो की ख़रीद
की। इसमें कच्चे तेल की 77 प्रतिशत (2.5 अरब यूरो), 13 प्रतिशत (452 मिलियन यूरो) कोयले
और 10 प्रतिशत (344 मिलियन यूरो) तेल
उत्पादों की हिस्सेदारी रही।
रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात क़रीब 1.6 मिलियन बैरल
प्रतिदिन रहा, जो बीते महीनों की तुलना में 9 प्रतिशत कम था और फ़रवरी के बाद का
सबसे निचला स्तर था। हालाँकि कुल आयात में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पाकिस्तान में तेल खोजने
की ट्रंप ने की थी घोषणा, कहा था - क्या पता, शायद एक दिन पाकिस्तान भारत को तेल
बेच दें!
भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ और अतिरिक्त पेनल्टी लगाने की घोषणा करने के
कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ बड़ी ट्रेड डील की घोषणा करते हुए
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा था, "हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक
समझौता किया है, जिसके तहत पाकिस्तान और अमेरिका अपने विशाल तेल भंडारों के विकास
पर मिलकर काम करेंगे। हम उस तेल कंपनी का चयन कर रहे हैं जो इस साझेदारी का
नेतृत्व करेगी। कौन जाने, हो सकता है कि वो किसी दिन भारत को भी तेल बेच
दें!"
पीएम मोदी जिस ट्रंप को माय फ्रेंड ट्रंप कहकर भी तृप्त नहीं
होते थे, जिसके लिए वो अमेरिका में चुनाव प्रचार करने गए थे, उसी ट्रंप ने
आपत्तिजनक और भड़काऊ ढंग से लिख दिया - क्या पता, पाकिस्तान भारत को भी तेल बेच
दें।
ट्रंप यहीं रुके नहीं थे। कुछ दिन बाद उन्होंने कहा था,
"भारत
और रूस मृत अर्थव्यवस्थाएँ हैं।" इससे पहले ट्रंप भारत को "टैरिफ़
किंग" और "बड़ा दुरुपयोगकर्ता" बता चुके थे।
ट्रंप के नये दावे पर
भारत सरकार की उलझी हुई अस्पष्ट प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप के इस नये दावे कि भारत ने रूस से तेल ख़रीदना
बंद करने पर सहमति जता दी है, के बाद भारत सरकार ने प्रतिक्रिया दी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
"भारत
बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात करता है। ऊर्जा के लगातार बदलने वाले माहौल
में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। ऊर्जा की क़ीमतों
को स्थिर बनाए रखना और इसकी सप्लाई सुनिश्चित करना हमारे दो मक़सद रहे हैं।"
जायसवाल ने कहा, "जहाँ तक अमेरिका का सवाल है तो हम कई
साल से अपनी ऊर्जा ख़रीद का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले एक दशक में
इसमें लगातार प्रगति हुई है। अमेरिका के मौजूदा प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा
सहयोग को और बढ़ाने में रुचि दिखाई है और इस पर बातचीत जारी है।"
भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफ़ोन पर बातचीत करने के दावों को खारिज़ किया। यह पूछे जाने
पर कि क्या पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच कोई बातचीत हुई है, जायसवाल ने
जवाब दिया,
"ऊर्जा
मुद्दे पर अमेरिका की टिप्पणी के संबंध में, हमने पहले ही एक बयान जारी किया है, जिसे
आप देख सकते हैं। जहाँ तक टेलीफ़ोन पर बातचीत का सवाल है, मैं कह सकता हूँ कि प्रधानमंत्री
और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई चर्चा नहीं हुई है।"
भारत सरकार और उसके विदेश मंत्रालय ने इस मामले में जो भी जवाब
दिए, वह बहुत बचते हुए दिए गए जवाब थे। जवाबों में जो सवाल पूछे जा रहे थे उसके
स्पष्ट उत्तर नहीं थे। कह सकते हैं कि प्रतिक्रिया उलझाने वाली थी।
भारत ने सीधे नहीं किंतु अप्रत्यक्ष रूप से भी यह नहीं कहा कि
ट्रंप का दावा झूठा है, ना ही अपने किसी जवाब में यह इशारा दिया कि भारत ने कोई
ऐसा आश्वासन नहीं दिया है।
सीज़फायर विवाद, भारतीय एयर फोर्स को हुए नुक़सान का विवाद, ट्रंप
के भारत और पाकिस्तान तथा भारत की आर्थिक नीतियों को लेकर किए गए दावे, तमाम
घटनाक्रमों के दौरान भारत सरकार के जो भी जवाब रहे, उसी तरह इस बार भी जवाबों में
स्पष्टता कम दिखी।
नेता प्रतिपक्ष का प्रहार,
कहा - प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप से डरते हैं
ट्रंप के दावे के बाद लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने
पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया,
"प्रधानमंत्री
मोदी ट्रंप से डरे हुए हैं। वो ट्रंप को यह फ़ैसला लेने और घोषणा करने देते हैं कि
भारत रूसी तेल नहीं ख़रीदेगा। वो बार-बार की गई अनदेखी के बावजूद ट्रंप को बधाई
संदेश भेजते रहते हैं।"
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर से पहले विवादित ढंग से भारतीयों का
निर्वासन अमेरिका ने किया था। इस मामले में पीएम मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी पर
काफ़ी सवाल उठे थे। उन दिनों अमेरिका की ऐसी विवादित कार्रवाई के ख़िलाफ़ कोलंबिया
जैसे छोटे देश तक ने अद्भुत साहस का प्रदर्शन किया था और अमेरिकी सैन्य विमान को
अपनी ज़मीन पर उतरने की अनुमति तक नहीं दी थी! ब्राज़ील और
मैक्सिको जैसे देशों ने भी अमेरिका के ख़िलाफ़ सख़्त और स्पष्ट आपत्ति ज़ाहिर की
थी। किंतु भारत की मोदी सरकार ने चुप्पी साध ली और एक शब्द नहीं कहा!
इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का
अचानक सीज़फायर का वो चौंकाने वाला और विवादित दावा, उसके बाद पचासों बार उस दावे
को ताल ठोक कर दोहराना, भारत-अमेरिका डील, व्यापार, आर्थिक नीतियाँ, ख़रीद नीतियाँ, टैरिफ़
का बम, इन तमाम मामलों में मोदी सत्ता ने लगभग समर्पण वाला अंदाज़ दिखाया।
इन तमाम घटनाक्रम के दौरान ट्रंप आपत्तिजनक, अपमानजनक और लगभग
आदेशात्मक लहज़े में भारत के लिए बात करते रहे। बदले में मोदी सत्ता साइलेंट या
सरेंडर मोड में ही काम करती दिखी!
ट्रंप ने रूसी तेल
कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, भारत की निजी और सरकारी कंपनियों ने रूसी तेल ख़रीदना
बंद किया, कहा - भारत सरकार की नीतियों के तहत ख़रीद रोकी
24 अक्टूबर को कुछ रपटें छपीं, जिसमें दावा किया गया कि रूसी तेल
मामले में रिलायंस और इंडियन ऑयल जैसी भारतीय दिग्गज कंपनियों को 21 नवंबर तक आयात बंद
करने का समय दिया गया है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना
के बाद बयान जारी कर कहा, "रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिका द्वारा
लगाए गए नए प्रतिबंधों के असर को हम स्टडी कर रहे हैं। हमारे सभी फ़ैसले स्वाभाविक
रूप से वैश्विक बाज़ार की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाते
हैं।"
अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर कड़े
वित्तीय प्रतिबंध लगाए, जिनसे भारत की निजी क्षेत्र की रिलायंस और सार्वजनिक
क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन तथा भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियाँ तेल ख़रीदती
हैं। इन प्रतिबंधों के तहत कंपनियों को 21 नवंबर तक रूसी कंपनियों के साथ लेन-देन
ख़त्म करने का समय दिया गया। उसके बाद रूसी तेल ख़रीदने वाली कंपनियाँ अमेरिकी बैंकों
से वित्तीय सहायता खोने का जोखिम उठाएगी।
रिलायंस के एक प्रवक्ता ने द टेलीग्राफ़ को बताया,
"अमेरिका
ने कंपनियों को 21 नवंबर तक रूसी तेल
उत्पादकों के साथ लेन-देन समाप्त करने का समय दिया है, जैसा कि प्रतिबंधों की
घोषणा में कहा गया है।" कंपनी ने लंदन के फाइनेंशियल टाइम्स को दिए बयान में
कहा,
"रूसी
तेल आयात का पुनर्मूल्यांकन चल रहा है और रिलायंस भारत सरकार के दिशानिर्देशों का
पालन करेगी।"
मीडिया रिपोर्टों की माने तो ट्रंप के इस फ़ैसले के बाद भारत
की घरेलू सरकारी कंपनियाँ अब रूस के बजाय और कुछ विकल्प के लिए हाजिर बाज़ार का
रूख करने लगी थीं। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन-मित्तल एनर्जी
ने कहा कि उसने रूसी तेल ख़रीदना बंद कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ कंपनियों का कहना है कि वे भारत
सरकार की नीतियों का पालन करते हुए रुस से तेल ख़रीदना बंद कर रहे हैं। रिपोर्ट के
अनुसार एचएमईएल ने कहा कि उसने हमेशा सरकारी नीतियों और नियमों का पूरी तरह पालन
किया है, और उसकी व्यावसायिक गतिविधियाँ भारत सरकार और उसकी ऊर्जा सुरक्षा नीति के
अनुरूप हैं। इस बयान का स्पष्ट अर्थ यही है कि कंपनी ने रूस से तेल ख़रीद रोकने का
फ़ैसला सरकारी नीतियों के तहत ही किया है।
रूसी तेल ख़रीद बंद करने
के बाद भारत ने अमेरिका से रक्षा समझौता भी किया!
ट्रंप की ज़िद के आगे मोदी सरकार का 'समर्पण' फिर दिखाई दिया, जब 31 अक्टूबर की शाम
ख़बरें आईं कि भारत ने अमेरिका के साथ रक्षा समझौता भी किया है! ग़ौरतलब है कि
अमेरिका रूस से भारत की हथियार ख़रीद को कम करने पर भी अड़ा हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत और
अमेरिका के बीच यह रक्षा समझौता अगले 10 वर्षों तक चलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट
हेगसेथ की मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की
बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के दौरान दोनों देशों ने 10 वर्षीय डिफेंस फ्रेमवर्क समझौते पर
हस्ताक्षर किए।
साझा प्रेस वार्ता में राजनाथ सिंह ने
मीडिया को बताया, "हमने तीन बार फ़ोन पर बातचीत की है। यहाँ आपसे (हेगसेथ) व्यक्तिगत रूप से
मिलकर ख़ुश हूँ। रक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर समझौते के हस्ताक्षर के साथ आज एक नया
अध्याय शुरू होगा। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत-अमेरिका संबंध और
मजबूत होंगे।"
अपने पहले कार्यकाल में भारत का ईरान
से तेल आयात बंद कराने वाले ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में रूसी तेल के साथ साथ
रूसी हथियारों की ख़रीद मामले में भी मोदी सरकार को येनकेन प्रकार से मजबूर करते
दिखाई दे रहे हैं। ग़ौरतलब है कि ट्रंप तेल और हथियार ही नहीं, कृषि, कृषि उत्पाद
और संसाधन, आईटी, ऊर्जा से लेकर दूसरे अनेक मामलों में भारत पर लगातार दबाव डाले
हुए हैं।
ट्रंप मोदी सरकार से जो कराना चाहते हैं, एक के बाद एक
वह मोदी सरकार करती जा रही है! किंतु इसमें मोदी सरकार और भारतीय जनता के
लिए अपमानजनक यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप आपत्तिजनक, आदेशात्मक और कभी कभी
भड़काऊ लहज़े के साथ यह सब करा रहे हैं!
ट्रंप की हर ज़िद के सामने लचीला बनने वाली मोदी सरकार
अपने उस लचीलेपन के बाद आत्मनिर्भर भारत का नारा लगाती है, किंतु आत्मसमर्पण वाला
चेहरा छिपाए छिप नहीं रहा।
इस बीच हमें यह याद रखना चाहिए कि जब
पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप को अपना पक्का दोस्त बता रहे थे, बिलकुल उसी समय अमेरिका
का मीडिया अपने राष्ट्रपति ट्रंप के सैकड़ों झूठ की बाक़ायदा सूची बना चुका था।
ट्रंप फ़ेक न्यूज़ के बादशाह के रूप में बदनाम हो चुके थे। उनके निजी आर्थिक
साम्राज्य तथा उनके सनकी और तुनकमिज़ाजी स्वभाव के बारे में भी लिखा जा चुका था।
ज़रूरत से ज़्यादा दोस्ती दिखाने की
चेष्टा और विदेश नीति जैसे मामलों में अति व्यक्तिगत रिश्ते दर्शाने का चंटपना -
ट्रंप और मोदी की कथित दोस्ती के यह दो ऐसे पहलू हैं, जिससे दूर रहा जा सकता था।
विदेशी नेता की उसके देश में जीत हो इसलिए भारत में पूजा-हवन करना, उसकी जीत के
बाद यहाँ बंदर की तरह उछल-कूद करना, ऐसी मूर्खता से प्रशंसकों को फ़र्क़ नहीं
पड़ता। लेकिन देश को पड़ रहा है।
ट्रंप भारत से जुड़ा हर दूसरे और तीसरे
दिन कुछ न कुछ ऐसा कहते जा रहे हैं, जिससे भारत सरकार ही नहीं बल्कि भारत की जनता
भी असहज महसूस करने लगती है। जिस अमेरिका को भारत की एक महिला प्रधानमंत्री ने
नाकों चने चबा दिए थे, उस भारत के नॉन बायोलॉजिकल पीएम अपना लॉजिक लगा नहीं पा
रहे।
(इनसाइड इंडिया, एम वाला)










